मैने पहलीबार अपने अंतरात्मा को मरते हुए देखाहै – समाजसेवी कंगन बेगुसराय

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यह कहानी समाजसेवी कंगन जी के द्वरा लिखी गई है.इसमे कंगन जी ने अपने दिल की बात बताई है.
आइये जानते है कंगन जी की जुबानी ये कहानी

सभी मित्रों,देवियों,सज्जनों वरिष्ठ जानो को मेरा प्रणाम, आज मै आपको anytechinfo.com के माध्यम से अपने दिल की बातो को बताने जा रहा हूँ.

आज अपने मस्तिष्क , आत्मा या मन के बारे में कुछ मेरे निजी विचार आपसे साझा करना चाहता हूं,
उदाहरण के तौर पर भागवत गीता से लिया हूं,जब अर्जुन मन से कमजोर हुए थे , तो श्री कृष्ण ने उनको विश्वास दिलाया था,आपको याद होगा उन्होंने अर्जुन के मन को ही मजबूत बनाने का प्रयास किया था

 

उन्होंने अर्जुन को विश्वास दिलाया था के तुम इस युद्ध को लड़ने के लिए सक्षम हो,अर्जुन का आत्मविश्वास जगाया श्री कृष्ण ने,इसी तरह की कुछ स्थिति हमारे साथ भी हुई है,पिछले कुछ दिनों से हम परेशान और अपने को कमजोर महसूस कर रहे थे , ऐसी स्थिति में हम चाह कर भी किसी काम को पूरी उर्जा से नहीं कर पाते हैं,अब समझने की बात ये है की हर इंसान में वही ईश्वरीय अंश है किसी ने उसको जान लिया है किसी ने नहीं जाना , हर व्यक्ति को इस चीज़ पर ध्यान देना चाहिए की कठिन परिस्थिति हम सभी के जीवन में आती है ऐसी परिस्थितियों से न ही महावीर बच सके, न ही कृष्ण,न ही राम,सीता माँ,विवेकानंद,
ुद्ध,सुकरात,इत्यादि इत्यादि…जब भी इन महान ब्यक्तित्व का मन कमजोर हुआ,तो सेकड़ो बाधा को झेलना पड़ा,पूरी निष्ठा और कर्मठता के साथ जब इन सभी ने अपने मन को जीता तब इन्होंने कभी भी जीवन की उन परिस्थितियों में कमजोर नहीं हुए,हमे भी ऐसा ही करना चाहिए क्योकि बिता हुआ वक़्त फिर वापस नहीं आता,और वक़्त ही सबसे बलवान है,मन से सदृढ़ रहना हमारा काम ही नहीं बल्कि हमारा धर्म है,कर्म है,सत्कर्म है,हम सभी को अपने मन को हर स्थिति में स्थिर रखना चाहिए,अब आप सोचेंगे के ये कहने में आसान है पर करना बहूत मुश्किल,मित्रों मैं पिछले कुछ दिनों से अपने ही कर्म को आदर्श मानकर चिंतन में लगे हुए थे,मैं अपने आप को कभी कमजोर या अकेला महसूस नहीं किया लेकिन कुछ दिनों से मैं अपने ही सतकर्मों से तिरस्कृत होकर मन मारकर सोया था,आज मैं अपने आँखों के सामने मन को मरते हुए देखा,जिसका बिस्यान्तर रूप मेरे द्वारा लिखे आत्मकथा में पढ़ने को मिलेगा,आज से मैं जग गया हूँ जिंदा सेर की तरह,सो कर भी देख लिया कितने कुत्ते सूंघ कर चले गये,अपना पराया का ज्ञान हुआ,किसी लेखक जी ने सच में लिखा है,”मन से जीता हुआ व्यक्ति वास्तव में जीता हुआ होता है और मन से जो हार गया है वो हर तरह से हार गया होता है
इसलिये मित्रों हमारा आत्मविश्वास ही हमारे हर सफलता का कारण है बिना उसके हम अपने जीवन का एक दिन भी व्यतीत नहीं कर सकते इसलिए इसको हमेशा के लिये दृढ रखना चाहिए,देखिये भागवत गीता में भी अर्जुन ने जब सब कुछ पूछ लिया तब आखिर में भगवान् से पूछा के मुझे कोई एक मार्ग आप बताइए जो सरल भी हो और जिसको करके मेरा उद्देश्य भी पूर्ण होता रहे,तब भगवान् ने अर्जुन को कहा के तुम अपना मन,अपना चिंतन हमेशा सत्कर्म में लगाये रखो”भगबान श्री कृष्ण चाहते तो अर्जुन को कह सकते थे के तुम मुझे प्रिय हो हे अर्जुन कोई युद्ध वगेरह सब छोडो मैं मोक्ष तुम्हे दे दूंगा,पर उन्होंने अर्जुन को कर्म की महत्ता बताई,
 

मित्रों मैं भी अपने कर्म के बदौलत आपके बिच अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए मोक्ष की प्राप्ति कर अपना अंतिम जीवन बिताना चाहता हूं,इसलिये हे जगत के पालनहरता हमे अपने जीवन के कठिन परिस्थियों में दृढ़ संकल्पित भाव के साथ आत्म सक्ति प्रदान करें साथ ही मेरे तमाम सहयोगियों,मित्रों, शुभचिंतको,बरिष्ठजनों एबं परिवार के सदस्यों पर अपना कृपा बनाये रखें,
धन्यवाद्
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मै Ravi Kr, मै एक Teacher(math,Computer) हूँ,और साथ मे Intrtnet Aur Technology पर artical लिखना मुझे पसंद है,मै फ्री-टाइम में AnyTechinfo.com पर चुनिन्दा हिंदी/Hinglish पोस्ट्स डालता हूँ. आप सभी से request है इस साईट को सफल बनाने की मेरी कोशिश में अपना सहयोग दें. अगर आपको यह Post अच्छा लगा हो तो कृपया इसे Facebook And Other Social Media पर Share जरूर करें| आपका यह प्रयास हमें और अच्छे Article लिखने के लिए प्रेरित करेगा| AnyTechinfo.com को The best Hindi Blog बनाने के लिए बस आप लोग अपना साथ बनाए रखे और हमें सपोर्ट करते रहें.

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