अपनी जीत का श्रेय किसे दे

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ज़मीर ज़िंदा रख, कबीर ज़िंदा रख..
सुल्तान भी बन जाए तो, दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख..!
हौसले के तरकश में,
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख..
हार जा चाहे जिन्दगी मे सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रख..!Ji Ha Dosto , Yahi Ummid Se Baitha Hu,  Chhodo Mai Koi Sayar to nahi blogger hu,
क्या हमें ये पता है कि हमारे सभी पूर्वज – भगवान Ram, भगवान Krishna , आचार्य Chankay आदि कितने बड़े Management Guru थे, वे कितने बड़े लीडर थे ?

Bad Karte Hai, Ayodha Ke Raja Sri Ram Ji Ko , To Dosto( मित्रों ) Mai Aaplogo Se Ek Request  ( निवेदन ) Karta Hu,  Ki Iss article को किसी जाति विशेष से न जोडें. अपनी उन्नति के लिए ज्ञान कही से भी मिले, कृपया लेते रहें. Aap Is Post Se Sirf Sikhe na ki Isse Kisi Dharm Se Jodkar,  Article ka jo kahne ka Bhaw hai, Uske Arth ka anrth na kare.

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दृष्टि  ( VISION )
किसी भी लीडर के लिए सबसे जरूरी गुण होता है – विजन. श्री राम का विजन स्पष्ट था. वे एक ऐसा राज्य चाहते थे जिसमें प्रजा को कोई कष्ट न हो. उनका मानना था कि “प्रजा के दुख” की सजा” – “राजा या शासक” को मिलनी चाहिए.
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मूल्य ( VALUES )
विजन क्लीयर होने के बाद लीडर को तय करना होता है कि वह किन मूल्यों के सहारे इस विजन को कार्यरूप देना चाहता है. श्री राम का तो पूरा जीवन ही मूल्यों का समूह लगता है. माता-पिता की आज्ञा का पालन, प्रजा की देखभाल, दीन-दलित का उद्धार जैसे तमाम मूल्य.
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रणनीति 
भगवान राम चाहते तो अकेले ही लंका विजय कर सकते थे. लेकिन लंका विजय तक उन्होंने “अपने दल के हर सदस्य की क्षमता” का पूरा-पूरा उपयोग करने की रणनीति बनाई, जैसे लक्षमण जी, हनुमान जी, सुग्रीव इत्यादि.
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 प्रोत्साहन ( MOTIVATION )
हमेशा अपनी दूसरी पंक्ति के व्यक्तियों को प्रोत्साहित करें. मित्रों मान कर चलिए हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम लीडर बनाते हैं या अनुयायी (Follower).किसी भी लीडर की सफलता “सिर्फ और सिर्फ” इस बात पर निर्भर करती है कि “वह अपने लोगों” को कितना Motivate कर पाता है. श्री राम ही नहीं, उनके दल की “द्वितीय पंक्ति के लीडर” भी मोटिवेशन के महत्व को समझते हैं. हनुमान जी समय समय पर अपनी शक्ति को भूल जाते थे. तब जामवंत उन्हें उनकी क्षमताओं का एहसास कराते हैं.

 

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श्रेय ( CREDIT )
महान लीडर वह होता है जो अभियान की सफलता का श्रेय “खुद लेने के बजाय अपनी टीम के सदस्यों”, जी हाँ “अपनी टीम के सदस्यों” को देता है.Previous Post
लंका विजय के बाद उन्होंने कितनी सहजता से अपनी जीत का श्रेय गुरू वशिष्ठ की कृपा और वानर भालुओं की सेना को दे दिया.
किसी ने बिलकुल सही कहा है :-
ज़मीर ज़िंदा रख, कबीर ज़िंदा रख..
सुल्तान भी बन जाए तो,
दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख..!
हौसले के तरकश में,
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख..
हार जा चाहे जिन्दगी मे सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रख..!
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