विश्वास नहीं करने की सजा

कोई शिकायत इसलिए नही करता क्योंकि पैसो की काफी तंगी थी सब चुपचाप थे ये सिलसिला यू ही चलता रहा पैसो ने उनकी सारी पुरानी यादें विलुप्त कर दी थी,सिवाय एक व्यक्ति के वो थे घर के मुखिया |

हमेशा ही उनके मन मस्तिष्क पर कुछ सवाठते रहते थे क्या उन्होंने अपने एक परिवार के सदस्य के साथ जो किया वो सही था बस यही सोच कर सारा दिन निकाल देते और फिर अगले दिन वही सब सोचने लगते सोचने की इस प्रवृत्ति ने उन्हें एक बीमारी की गहरी खाई मे ढकेल दिया दिल के दौरे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया अब क्या होगा,

वही सब एक बार फिर अचम्भित हो गये जब फिर से लिफाफा घर आया और उसमें जो था माँ ने बेटे से पूछा ये क्या है, कहा ब्लैंक चेक इसमें जो हम पैसे भरेगे उतने ही मिलेगे फिर क्या जैसे तैसे पिता जी को एडमिट करवाया गया शहर की मानी हुई डॉक्टर ने उनके केस को लियी डॉ विशेषिका सिन्हा जब घर के और सदस्यों को पता चला डॉक्टर साहिबा उन्ही की कास्ट से है,

तो उन्हें एक झूठी मगर सच्ची तसल्ली मिली डॉक्टर जब ऑपरेशन कक्ष मे मरीज के पास पहुँची तो उन्होंने मास्क लगा रखा था लेकिन जैसे ही दोनों की नज़रे मिली श्री विश्व नाथ जी को ये आभास हुआ ये जरूर कोई अपना हैऑपरेशन सफल रहा पिता ने डॉ. से मिलने की इच्छा जाहिर की क्यों कि अब उन्हें यकीन हो गया था डॉ विशेषिका कोई और नही उनकी बड़ी बेटी ही है,

जिसे उन्होंने बेबुनियाद शक पर केवल सामाजिक बदनामी के डर से बिनी किसी सबूत के परिवार से बहिष्कार कर दिया और कभी न अपनी शक्ल दिखाने को कहा।

 

यही सब वो सोच ही रहे थे कि डॉ आ गई उनके आते ही पिता ने बैठे हुए लज्जा से नजरे झुका कर हाथ जोड़ लिए डॉ ने कहा पिता जी मै केवल आप के कहने से ही आपके सामने आई हूँ,आपकी कही हुई हर एक बात मेरे लिए आज भी एक आदर्श है आपने मुझे खुद से दूर किया पर मैं हमेशा ही अपने परिवार के साथ थी बस आपसे एक विनती है बाहर वालो के साथ साथ अगर आपने मुझे भी कहने का मौका दिया होता तो शायद ही आपको इतनी तकलीफ होती,

हाँ ये सच है मैने अपनी इच्छा से मुकेश को चुना पर मैं कभी आपके खिलाफ नहीं जाती वो ये सब कहे जा रही थी पर पिता का ध्यान कही और था वो पश्चाताप के सागर मे डूबते चले जा रहे थेअचानक ही उनका ध्यान टूटा और फिर उनका सब्र का बाँध टूट पड़ा वो महीने का लिफाफा वो ब्लैंक चैक वो सब उनकी आखो के सामने चलचित्र को भाँति चलने लगे और मन ही मन सोचने लगे कि शायद ही कभी वो अपनी बेटी के दिए इस जीवन से कर्ज मुक्त हो सके |

कहानी कल्पना पर आधारित है अगर पसंद आयी हो तो प्रोत्साहित करे..और comment में बताये और आप हर हमेशा ध्यान में रखे आपका कोई बेटा या बेटी है तो उससे समझने की कोशिस करे धन्यबाद |

20 COMMENTS

  1. News blog मे copyright images use करने पर Adsene Disable क्यो नही होता? मै ऐसे images की बात कर रहा हूँ जो बडे बडे Celebrity की है

  2. Sir mene apne blog ki theme change ki hai aap ek baar open karke dekh le aur agar kuch kami ya kuch edit karne se rah gaya hai to please bata dijiye bahut mehrbaani hogi.

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