Life में daro मत क्युकी dar के आगे सब बेकार है

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मित्रों पहले समझते हैं डर को और इसके दुष्परिणाम को, इस डर ने हमें कितना खोखला बना दिया है, देखते हैं ……
Life bahut sare Dar hote hai, but hum har ek Dar se aage jana chahiye,  Dar ke aage Sub Kuchh Bekar hai,
Mai Aapko yaha pe Dar ka Important facts Bata raha hu.
  • हमें तैरने में डर लगता है, कहीं डूब न जाएँ–
    इसलिए आजतक हमें तैरना नहीं आया, Ye Hai Dar log aise- aise Dar ke karan pichhe rehte hai,
  • हमें पढ़ाई से डर लगता है, कहीं fail न हो जाएँ –इसलिए आजतक हम अच्छे student नहीं बन पाये.Ye jayadatar students ke sath aisa hi hota, but hame Padhai me darne ki jarurat nahi hai,
  • हमें office में नये तरीके को आजमाने में डर लगता है, कहीं Boss नाराज न हो जाए– इसलिए हम बहुत अच्छे employee नहीं बन पाए.
  • हमें कार, स्कूटर चलाने में डर लगता है, कहीं accident न हो जाए — इसलिए हमें आजतक कार, स्कूटर चलानी नहीं आई. हमें स्कूल, कॉलेज, ऑफिस के function में stage में आने में डर लगता है, कहीं लोग मजाक न उड़ाएं  ,इसलिए आजतक हर function में हम छिप कर बैठते हैं. हमें खाना बनाने या खाने में नया experiment करने में डर लगता है, कहीं ख़राब बन गया तो घरवाले क्या कहेंगे – इसलिए आजतक हमने खाने में कुछ नया नहीं kiya.
  • हमें competitive exam देने में डर लगता है, कहीं fail हो गए तो लोग क्या कहेंगे – इसलिए आजतक अच्छी नौकरी की तलाश कर रहे हैं.
  • कोई नया काम या business करने में डर लगता है, कहीं पैसा डूब गया तो –
    इसलिए आजतक सारे business plan दिमाग में ही धक्के खा रहे हैं.
  • किसी भी काम में risk लेने का डर, कहीं काम ख़राब हो गया तो मेरे पीछे मेरे बीबी, बच्चों का क्या होगा -इसलिए आजतक कभी risk ही नहीं लिया.
  • हम खेलेंगे नहीं या अपने बच्चे को खेलने नहीं भेजेंगे, क्योँकि कहीं चोट न लग जाये– इसलिए न खुद और न हमारा बच्चा अच्छे खिलाडी हैं. मित्रों इसी तरह के हजारों प्रश्न हमारे दिमाग में चलते रहते हैं ……
Think:–मित्रों इस डर की वजह से अपनी जिंदगी में “अपने सोचे हुए काम न कर पाना जन्म देता है – अपने अंदर धीरे धीरे उठते हुए तूफान को”, जो एक दिन निराशा (frustration) में तब्दील हो जाता है,  जिससे आगे चलकर हम चीड़-चिड़े हो जाते हैं और धीरे धीरे हर किसी से अपने को काटने की कोशिस करते है और कई बार तो हम Depression में भी चले जाते हैं.
मित्रों अब ऊपर वाले examples में सबसे पहले मन में सोचिये कि सबसे ज्यादा बुरा क्या होगा.
हम ये सोचने की जगह कि ” कहीं ऐसा न हो जाये”, अगर हम ये सोचेंगे कि “ज्यादा से ज्यादा क्या होगा” तो मानिये मित्रों हम कभी भी निराश नहीं होंगे, देखते है कैसे :-
  1. ज्यादा से ज्यादा हम वाकई डूब जायेंगे. Isse badhke Kuchh hoga , bilkul nahi hoga,
  2. ज्यादा से ज्यादा हम वाकई क्लास में fail हो जायेंगे
  3. ज्यादा से ज्यादा Boss हमें नौकरी से निकाल देगा.
  4. ज्यादा से ज्यादा हमारा सही में accident हो जायेगा.
  5. ज्यादा से ज्यादा लोग हमारा मजाक ही तो उड़ाएंगे.(f)…..ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे बनाये खाने की बुराई ही तो करेंगे.
  6. ज्यादा से ज्यादा हम Competitive exam में fail हो जायेंगे.
  7. ज्यादा से ज्यादा हमारा सारा पैसा डूब जायेगा.
  8. क्या कभी हमारे परदादा ने risk नहीं लिया, उन्होंने अगर कभी Risk लिया तो क्या पूरा खानदान खत्म हो गया, नहीं न …..
  9. ज्यादा से ज्यादा हमें चोट ही तो लगेगी.
Think::—-  मित्रों ज्यादा से ज्यादा सोच लेने से कोई ज्यादा से ज्यादा थोड़े ही हो जाता है,
पर हमारे अंदर का डर खत्म हो जाता है kyuki  हम ज्यादा से ज्यादा worst के लिए तैयार हो जाते हैं और उस काम को करने की शुरुआत हो जाती है, बस मित्रों पहले कदम ही की तो जरुरत है जिंदगी चलाने के लिए…….
हमें सिर्फ और सिर्फ अपने सोचने के अंदाज को बदलना है, फिर देखिये हमारी जिंदगी कैसे चमत्कार करती है.
दोस्तों कैसा लगा हमारा ये आर्टिकल हमें कमेंट में बताये

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